शारीरिक भाषा एक अशाब्दिक सम्प्रेषण है। कुछ लोग मानते है, कि शारीरिक भाषा प्राकृतिक होती है। जबकि कुछ लोग मानते है, कि शारीरिक भाषा इंसान सीखता है। दोनों ही बातें सत्य है। एक बच्चा अपने माँ के स्तन की ओर आकर्षित होने स्वतः सिख जाता है। जबकि बैठने की स्थिति से लेकर चलने तक वो सीखता है। झुकी कमर वाले लोग कमर झुककर चलना स्वतः सीखते है। अतः ये बात साफ है, कि शारीरिक भाषा प्राकृतिक और सीखा हुआ दोनो है।
निकोलस बुथमेन, डेल कारनेगी जैसे सैकड़ो लोगो का मानना है, की इंसान की सफलता में शारीरिक भाषा का बड़ा योगदान होता है। शारीरिक भाषा इंसान के बारे में सब कुछ बता देती है, चाहै इंसान कितना भी उसे छुपाए। कोई आदमी तनाव में है। वो कितना भी खुद को प्रसन्न दिखाने का प्रयास करें। लोग समझ जाते हैं, कि वह तनाव में है। इसी प्रकार कई बार आप समझ जाते हो कि सामने वाला झूठ बोला है। हम सूट पहने हुए आदमी को बहुत बड़ा समझ लेते हैं। जब की वो साधारण होता है। ये सब सामने वाले पहनावे के साथ सभी प्रकार की अशाब्दिक सम्प्रेषण पर निर्भर करता है।
कौन लोग शारीरिक भाषा को छुपा लेते है? Which persion hide body language? :-
आमतौर पर एक्टिंग करने वाले लोगों को शारीरिक भाषा छुपाने की ट्रेनिग दी जाती है। जिस कारण फिल्मों में हुए जूठे किस्से भी हमें सच लगते हैं। निकोलस बुथमेन की किताब '90 सेकेंड में सामने वाले को प्रभावित करे' में उन्होंने कहा है कि बहुत अधिक उम्र वाले लोग भी अपनी शारीरिक भाषा को बहुत अच्छे से छुपा लेते है। सेल्समैन भी लगातार लोगों से सम्प्रेषण करते-करते खुद भी शारीरिक भाषा पर नियंत्रण करना सीख जाते है।
शारीरिक भाषा सीखना क्यो आवश्यक है? :-
शारीरिक भाषा वैसे तो कोई भी इंसान स्वतः सिख जाता है। परन्तु स्वतः सीखी गई शारीरिक भाषा हमेशा प्रभावी सम्प्रेषण को जन्म नही देती है। यदि कोई सेल्समैन समान बेच रहा है। वो उस समान की लगातार तारीफ किये जा रहा है। जबकि उसकी शारीरिक भाषा के अनुसार वो अपने हाथ छुपा रहा हो। ऐसा में सामने वाला स्वतः समझ जाएगा कि वो झूठ(फैक) बोल रहा है। इसी प्रकार हम इन्ही छोटी-छोटी गलतियों से हम सम्प्रेषण को अप्रभावी बना देते है। इसलिए शरीरिक भाषा को सीखना आवश्यक है।


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