शाब्दिक सम्प्रेषण पर मैं पहले ही एक उसके हर एक हिस्से की पोस्ट बना चुका हूँ। जिनके लिंक ये निम्नलिखित है।
शाब्दिक संप्रेषण के विपरीत अशाब्दिक संप्रेषण ऐसा संप्रेषण है जिसमें शब्दों की आवश्यकता नहीं होती है। ज्यादातर लोग इस प्रकार के संप्रेषण को प्राकृतिक मानते हैं। जबकि यह प्राकृतिक और सीखा हुआ दोनो होता है।अशाब्दिक संप्रेषण हमारे आसपास रहने वाले लोगों से मिलता जुलता होता है। जिनके साथ में अधिक से अधिक समय बिताते हैं। गुस्सा आने पर आवाज का तेज हो जाना प्राकृतिक अशाब्दिक संप्रेषण है। इसे क्या तेरी हमारे बाल हमारे पहनावा आदि सिखाया गया अशाब्दिक संप्रेषण है।
शाब्दिक संप्रेषण की तरह ही अशाब्दिक संप्रेषण के भी कई प्रकार होते हैं। जिसमें प्रमुख प्रकार है।
शारीरिक भाषा Body Language
दूरी की भाषा Distance Language
पैरा लेजवेज Pera Language
सकेत भाषा Sign Language

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