अवसर हम सेक्स को गलत समझते हैं। कई लोग इसके बारे में बात करना भी पसंद नहीं करते हैं। इसे एक गलत कार्य के रूप में देखा जाता है। अवसर बच्चों को इससे दूर रखा जाता है। जब सेक्स इतना ही गलत है। तो सेक्स किया क्यों जाता है?, आखिर सेक्स जैसे शब्द इतने प्रसिद्ध क्यों है? यह Blog उन बच्चों के लिए जो सेक्स को नही समझते है। क्या यह समाज में आवश्यक है।
सेक्स क्या है?
यह सवाल आप सब के मन में होगा, जो सेक्स को नही जानते है। सेक्स? को अलग-अलग शब्दों से व्यक्त किया जाता है। इसे हमें 10वी पढ़ना शुरू कर देते है। पर इसके बाद भी हम इसे नही समझ पाते है। क्योंकि इसे अलग-अलग शब्दों में व्यक्त किया जाता है। जैसे सहवास, प्रजनन एवं सम्भोग आदि। सेक्स का अर्थ होता है, कि जब दो अलग लिंग(नर एवं मादा) का आपस में जुड़ाव।
दो वर्ग
आप जानते होगे कि हर जानवर,इंसान,जीव,जन्तु, पंछी या पेड़ पौधों के दो वर्ग होते है। पहला नर तथा दूसरा मादा। जैसे मुर्गा-मुर्गी, नाग-नागिन, लड़का-लड़की, नर केला-मादा केला, कुत्ता-कुत्तिया, मोर-मोरनी आदि।
किन्नर
जैसा कि अभी हमने कहाँ नर एवं मादा जन्तुओ के दो वर्ग पाए जाते है। तब हम किन्नर को तृतीय वर्ग कहते है। अगर आप थाईलैंड से हो या आप थाईलैंड जा चुके हो तब आप किन्नर को अच्छे से समझते होगे। अगर आप थाईलैंड से सम्बंध नही है। तब मन में ये सवाल होगा कि किन्नर क्या है। किन्नर का अर्थ होता है, कि अधूरा नर या मादा अथार्त वह इंसान जो पूर्ण रूप से न तो नर है। और न ही मादा। जिस कारण ये प्रजनन करने में असमर्थ होते है। मै ये तो नही जनता की किन्नर जानवरों या अन्य किसी जन्तु होते है। या नही होते है। पर ये वर्ग इंसानो में पाया जाता है और भी इसे अब समझ चुके होगे। कि किन्नर किस प्रकार हमसें अलग होते है।
आप मेरे आगे आने वाले ब्लॉग में सेक्स को और अधिक समझेंगे।
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